एक सफर हैं जो चलता रहता है कितने बरसों से.. सदियो से..,
हजार रास्ते है पर यह दिल गुजरता है तो बस तेरे ही गलियों से..।
हर साल की यही कहानी हैं..
कैलेण्डर नया और कील पुरानी है।
शायरों से तालुक रखो तबीयत ठीक रहेगी..
ये वोह हकीम हैं को लफ्जो से इलाज करते हैं.
मेने तो अपने होंठों की हर खुशी उसके नाम कर दि थी,
मेनै तो अपने हिस्से की जमीन उसके लिए नीलाम करदी थि,
क्या दे गई बेवफा मुझे जाते-जाते,
मैंने तो अपनी जिंदगी उसके नाम करदी थी
वक़्त ने हमें भुला दिया है,कहीं
मुकद्दर भी ना भुला दे।।
प्यार हम इसलिए नहीं करते कहीं
फिर से हमें कोई ना रुला दे।।
वो मेरे दिल पर सिर रखकर सोई थी बेखबर,
हमने धड़कन ही रोक ली कि कहीं उसकी नींद ना टूट जाए।
काश कोई लिखावट ऐसी भी होती,
जिसका असर उनपे भी होता,
बया हम भी कर सकते हे लफ्ज़ से दिल का हाल,
क्या करू खफा हो जाएंगे ये डर सताता है।
कौन समझे मेरे दिल के अकेलेपन को,
कि उनके हाथों से तो मेरा हाथ छूट गया..
पर उनकी यादें मेरे दिमाग में आना नहीं छोड़ती।
तेरे नाम से दिन गुजरे,
तेरे नाम से शाम मेरी,
लंबी उमर जीने का नहीं सोचता मैं,
बस एक पल तेरे साथ जीने की ख्वाहिश मेरी।


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